जिंदगी

अस्पताल एक ऐसी जगह है,
जहां पर जिंदगी पैसे के एवज में,
किसी और के पास गिरवी होतीहै.
सी सी यू के बंद कमरे में
रात दिन लाइट के बीच में
पता ही नहीं चलता था.
जिंदगी कब चलती और ठहरती है.
अस्पताल का वॉर्ड बॉय
एक बार मेरे बेड की,
चादर बदलते हुए बोला,
अंकल सारा दिन रात
सोते जागते रहते हो.
मैंने कहा बंद कमरे में,
दिन-रात का पता ही नहीं चलता.
वह सहनभूति जताते हुए बोला
मैं आपको समय बता दूंगा.
मुझे पता था,
मेरा समय ठहरा है,
और जिंदगी किसी और के पास गिरवी है. लगभग एक दशक के बाद ,
दिल को तीसरीबार,
चार दिन सजा भुगतवा के ,
जब अस्पताल से निकलने ही वाला था . डिस्चार्ज होने के पहले
एक खूबसूरत डाइटिशियन ने,
डाइट चार्ट का लिफाफा
बढ़ाते हुए मुझसे बोली.
पूरी जिंदगी अब आप को
यही डाइट चार्ट,
फालो करना है
लिफाफा पढ़कर कहा,
“मैं डायबिटिक नहीं हूं”
वह जाते जाते मुस्कुरा कर बोली
तो अबआप मीठी चीजें भी खा सकते हैं
यह मेरी तरफ से गिफ्ट है,

मैं जिंदगी को कैद से छुड़ाकर,
घर वापस ले आया.
जिंदगी अब पहले से भी
ज्यादा खूबसूरत लग रही थी
इन चार दिनों में,
घर भी बहुत सुंदर हो गया था
डाइट चार्ट खोल कर
मैं खाने के लिए टेबल में बैठ गया
लेकिन किसी की सिसकियों ने
मेरा ध्यान बटा दिया
मैंने देखा एक कोने पर
मेरा दिल बैसाखियों के सहारे रो रहा था
मैंने प्यार से बहुत समझाया
पर उसने गुस्से
कोई जवाब नहीं दिया
मैंने झुंझला के कहा
मेरी जिंदगी है मैं जो चाहूं करूं,
पास ही खड़ी जिंदगी ने
गुस्से मे मेरा डाइट चार्ट
फाड़ कर फेंक दिया
और बोली अपने दिमाग से यह
फितूर निकाल दो कि
यह जिंदगी तुम्हारी है.
मैंने खाना नहीं खाया
सोचने लगा सही तो है
पहले मां फिर पत्नी
बेटी बेटे और नाती पोते.
अब मैं खाना खाते खाते.
पछता रहा था
जिंदगी 10 साल पहले
जहां थी फिर
वही से शुरू करना पड़ेगा
मै रो रहा था
दिल मुझे सहला रहा था
जिंदगी मुस्कुरा के
मेरे आंसू पोंछ कर चली गई
जिंदगी बिल्कुल मा जैसी होती है
इन सब के बीच
पूछ भी नहीं पाया
अए जिंदगी
तू और कितने इम्तिहान लेगी।